सरकार ने माना मोमेंटम झारखंड के बाद किया फर्जी कंपनी से 6400 करोड़ का करार, पूछे जाने पर विधायक को दी गलत जानकारी

Akshay Kr. Jha

Ranchi, 13 December : मोमेंटम झारखंड का सच क्या है यह धीरे-धीरे सामने आ रहा है. अब तो सरकार भी मान रही है कि मोमेंटम झारखंड के बाद उसने ऐसी-ऐसी कंपनियों के साथ करार किये हैं जो पूरी तरह से फर्जी हैं. newswing.com  ने मोमेंटम झारखंड पर एक सिरीज चला कर वैसी कंपनियों के बारे जनता को जानकारी देने की कोशिश की थी, जो या तो फर्जी हैं या फिर एक बेहद मामूली और बस करार करने के लिए बनी कंपनी है. उसी खबर का हवाला देते हुए निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने विधानसभा में सवाल पूछा तो सरकार ने माना कि एक ऐसी कंपनी के साथ 6400 करोड़ रुपए का करार हुआ है जो जाहिर तौर पर कहीं है ही नहीं.

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क्या था सवाल और सरकार ने क्या दिया जवाब

विधानसभा के शीतकालीन सत्र में निरसा विधायक अरुप चटर्जी ने मामले को लेकर सरकार से सवाल किया

सवाल : क्या यह बात सही है कि SIBICS Housing p Ltd. नामक एक कंपनी ने Deptt. of Industry, Mines & Geology से EPS pannel Single, Double, Multi-layer PCB बनाने के लिए 6400 करोड़ का करार किया है.

सरकार का जवाब : उत्तर स्वीकारात्मक है. नगर विकास एवं आवास विभाग झारखंड के साथ कंपनी ने Letter of Intent (LOI) पर हस्ताक्षर किया है.

-     जवाब संतोषजनक है.

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सवाल : क्या यह बात सही है कि कंपनी ना तो मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स में रजिस्टर है और ना ही ये कंपनी दूसरा कोई काम कर रही है. इस कंपनी की कोई वेबसाइट तक नहीं है ना ही कोई पता ही है.

सरकार का जवाब : हस्ताक्षरित LOI  में कंपनी का पताः सबरजोत सिंह, डायरेक्टर, SIBICS Housing p Ltd, 2&4 jeevan Deep Annexe, 10 parliament Street, New Delhi. बताया गया है.

-     इस जवाब में पूछा गया है कि क्या ये कंपनी मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट में रजिस्टर है. लेकिन इस सवाल का जवाब नहीं दिया गया. सवाल किया गया कि क्या ये कंपनी दूसरा कोई काम कर रही है. इस सवाल का भी जवाब सरकार ने नहीं दिया. बस सरकार ने कंपनी का एड्रैस जवाब में लिख दिया.  

सवालः यदि पूछे गए दोनों सवालों के जवाब स्वीकारात्मक हो, तो क्या सरकार उक्त विषय पर एक उच्च स्तरीय समिति गठन कर समुचित जांच कराने की मंशा रखती है. हां तो कब तक, नहीं तो क्यों?

सरकार का जवाब :  यथा उपर्युक्त कंडिका (1) एवं (2).  

-     इस सवाल का जवाब सरकार ने देना मुनासिब ही नहीं समझा. जबकि कंडिका 1 और 2 के जवाब से कहीं भी इस सवाल का उत्तर नहीं मिलता है.

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गलत पता बताया सरकार ने

सरकार ने दूसरे सवाल के जवाब में जो पता बताया है वो गलत है. उस पते की पड़ताल जब newswing.com ने की तो मालूम चला कि ये पता किसी Safeway Insurance Brokers Pvt . Ltd का है. कंपनी 1966 से ही Insurance का काम कर रही है. इसके डायरेक्ट इंदरजोत सिंह और रितु गुप्ता हैं. वहीं कंपनी के एक कर्मी ने बताया कि Safeway Insurance Brokers Pvt . Ltd और SIBICS Housing p Ltd आपस में पार्टनर हैं. दोनों साथ मिलकर काम करती है. कंपनी के डायरेक्टर सरबजोत सिंह से बात करने की कोशिश की गयी तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया. अब सवाल ये उठता है कि जो कंपनी पिछले दशकों से Insurance का काम कर रही है वो कैसे EPS pannel Single, Double, Multi-layer PCB बनाने के लिए 6400 करोड़ का करार कर सकती है. जबकि कंपनी ना तो मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स में रजिस्ट्रड है और ना ही कंपनी की अपनी कोई वेबसाइट या पता है.

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ऐसी कौन सी यह कंपनी है, जो कहीं नहीं है

सरकार के Dept. of Industry, Mines & Geology ने एक कंपनी SIBICS Housing P Ltd से EPS pannel Single, Double, Multi-layer PCB बनाने के लिए 6400 करोड़ का करार किया है. लेकिन, गौर करने वाली बात ये है कि ये कंपनी ना तो मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफयर्स में रजिस्टर है और ना ही ये कंपनी दूसरा कोई काम कर रही है. या पहले किसी काम को कहीं पूरा कर चुकी है. गुगल पर सर्च करने पर ना ही इस कंपनी का अपना कोई वेबसाइट मिलता है और ना ही कोई एड्रेस. काफी जांच पड़ताल करने के बाद पता चला कि यह कंपनी पूरी तरह से फर्जी है.

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