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सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा: नेताओं से जुड़े मामलों के लिए गठित होंगी 12 विशेष अदालतें

News Wing

New Delhi, 13 December: केन्द्र ने आज उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि नेताओं की संलिप्तता वाले उन आपराधिक मामलों के फैसलों के लिये कम से कम 12 विशेष अदालतें गठित की जायेंगी जिनमें वे आरोपी हैं. केन्द्र ने देश भर में सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों का विवरण एकत्र करने के लिये न्यायालय से कुछ समय देने का भी अनुरोध किया.

विधिनिर्माताओं की संलिप्तता वाले मुकदमों के लिये7.8 करोड रुपए का आबंटित 

विधि एवं न्याय मंत्रालय ने शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामें में कहा कि इस काम के लिये 7.8 करोड रूपए आबंटित किये गये हैं. मंत्रालय ने शीर्ष अदालत के एक आदेश के बाद यह हलफनामा दाखिल किया है. न्यायालय ने कहा था कि विधिनिर्माताओं की संलिप्तता वाले मुकदमों के लिये विशेष अदालतें गठित करने की योजना पेश की जाये. केन्द्र ने विभिन्न उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों में विधिनिर्माताओं के खिलाफ लंबित मामलों का विवरण पेश करने के लिये समय देने का अनुरोध करते हुये कहा कि उच्च न्यायालयों से जानकारी मांगी गयी है और उनके जवाब की प्रतीक्षा है.

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एक साल के लिये 12 विशेष अदालतें नेताओं के खिलाफ लंबित मामलों के निबटारा करेंगा

मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव रीता वशिष्ठ के माध्यम से दायर हलफनामे में कहा गया है कि इस योजना के अनुसार, ‘‘एक साल के लिये 12 विशेष अदालतें’’ नेताओं के खिलाफ लंबित मामलों के निबटारे के लिये गठित की जायेंगी. इसमें कहा गया है कि वित्त मंत्रालय ने सिद्धांत रूप में इस योजना को आठ दिसंबर को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है.

1581 आपराधिक मामलों के बारे में विवरण पेश करने का निर्देश दिया गया

शीर्ष अदालत ने एक नवंबर को केन्द्र ,सांसदों और विधायकों की संलिप्तता वाले 1581 आपराधिक मामलों के बारे में विवरण पेश करने का निर्देश दिया था. इन सांसदों और विधायकों ने 2014 के आम चुनावों के दौरान नामांकन दाखिल करते समय इसकी घोषणा की थी. न्यायलय ने सरकार से यह भी जानना चाहा था कि 1581 मामलों में से एक साल के भीतर कितने मुकदमों का निबटारा किया गया और इनमें से कितने में सजा हुयी या अभियुक्त बरी हुये.

गैर सरकारी संगठन से प्राप्त हुआ है 1581 मामलों का आंकडा

सरकार के हलफनामे में कहा गया है कि 1581 मामलों का आंकडा एक गैर सरकारी संगठन से प्राप्त हुआ है परंतु यह आंकडा उपलब्ध नहीं है कि किन अदालतों में ये मामले लंबित हैं,. हलफनामे में कहा गया है, ‘‘न्यायालय के आदेश में उल्लिखित सवालों का जवाब देने के लिये तथ्यों और आंकडों को एकत्र करना मुश्किल है. जिन राज्यों में ये मामले लंबित हैं, उनसे अपेक्षित विवरण एकत्र करने के लिये कार्रवाई शुरू की गयी है.’’ सरकार ने न्यायालय को सूचित किया था कि निर्वाचन आयोग और विधि आयोग ने आपराधिक मामलों में दोषी नेताओं को उम्र भर के लिये चुनाव लडने के अयोग्य घोषित करने की सिफारिश की है और यह सरकार के पास विचाराधीन है.

सजा पूरी करने के बाद छ: माह तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध 

न्यायालय जन प्रतिनिधित्व कानून के उन प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित करने के लिये दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है जो दोषियों को जेल की सजा पूरी करने के बाद उनके छह साल तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाता है.

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