मिनी विधानसभा सत्र को माइक्रो विधानसभा सत्र बनाने में जुटा विपक्ष, सदन की गरिमा को छोड़ दें, पर बच्चों के लिए तो परहेज करें: स्पीकर

Akshay Kr. Jha

Ranchi, 13 December : झारखंड विधानसभा शीतकालीन सत्र का समय सिर्फ चार दिन रखा गया. दो दिन बीत गए. लोकिन, सदन में ना तो किसी मुद्दे पर बहस हुई है और ना ही होने के आसार हैं. शुरुआत में विपक्ष ने छोटे सत्र का खूब विरोध किया. लेकिन, अब वो खुद ही ऐसा कर रहा है जिससे विधानसभा सत्र मिनी से माइक्रो कार्यकाल का होते जा रहा है. दूसरे दिन जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्ष ने सदन को चलने नहीं दिया. विपक्ष पिछले सत्र में पास विधेयक भूमि सुधार बिल पर इस सत्र में चर्चा करना चाहता है. जो कि असंवैधानिक है. कोई ऐसा विधेयक जो उसी सदन से पास हुआ हो, उस पर फिर से नए सत्र में चर्चा करने का कहीं कोई प्रावधान नहीं है. विपक्ष के ऐसे रवैये को देखते हुए सत्ताधारी पार्टी बीजेपी विपक्ष पर आरोप लगा रही है कि जब विपक्ष को बहस करना था तो वो वाकआउट कर गया और अब सदन को बाधित किया जा रहा है. कुल मिला कर दूसरे दिन सदन की कार्यवाही सिर्फ 50 मिनट ही चल पायी. ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या झारखंड में कोई मुद्दा ही नहीं है जिसपर विपक्ष और सत्तधारी पार्टी चर्चा कर सकें? क्या विपक्ष चाहता है कि सदन चले? 

सदन की छोड़ो बच्चों के लिए तो शर्म करें...

कार्यवाही शुरू होते ही प्रदीप यादव ने सबसे पहले गोड्डा में लग रहे अडाणी ग्रुप का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि वहां जो लोग जमीन देने का विरोध कर रहे हैं उन्हें जिला से बाहर भगा दिया जा रहा है. भय और आतंक का माहौल है. इतने में बीजेपी के सचेतक राधाकृष्ण किशोर ने चुंबन प्रतियोगिता पर सदन में बहस करने की बात कही. इस पर जेएमएम और बीजेपी के विधायकों ने खूब बहस किया. जेएमएम का कहना था कि क्या सदन में बहस करने के लिए और कोई मुद्दा नहीं है? बीजेपी के विधायकों ने इसे महिला अस्मिता से जुड़ा मामला बताया. चुंबन प्रतियोगिता पर छिड़ी बहस के बीच दोनों दल के विधायक भूल गए थे कि अतिथि दीर्घा में उनको देखने और सुनने योगदा स्कूल के बच्चे आए हैं. जो ये सारी चीजें देख रहे हैं. फिर जाकर स्पीकर महोदय ने उन्हें याद दिलाया कि बच्चे उन्हें सुन रहे हैं. वो यहां कुछ सीखने आए हैं. क्या सीख कर वो जाएंगे यहां से? इसपर प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने कहा कि सदन की कार्यवाही मोरहाबादी मैदान में चलनी चाहिए ताकि पूरा राज्य देख सके कि आखिर सदन में किन मामलों पर बहस होती है.     

सदन की प्रोसेडिंग लिखने का फिर क्या मतलबः हेमंत

जेएमएम की तरफ से तीन और जेवीएम की तरफ से एक कार्यस्थगन प्रस्ताव लाया गया. इन चारों को स्पीकर ने खारिज कर दिया. इसपर हेमंत सोरेन ने उठकर जवाब दिया कि जब अपनी बात हम सदन में रख ही नहीं सकते. प्रोसेडिंग में लिखी हुई चीज पर कार्रवाई होती नहीं है, तो फिर सदन में बात रखने का क्या मतलब. हेमंत ने टीवीएनएल में थर्ड और फोर्थ ग्रेड बहाली का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि सदन में इस बात पर सहमति बनी थी कि थर्ड और फोर्थ ग्रेड पर वहां के मूलवासियों का हक होगा. बावजूद इसके टीवीएनएल ने सारी बहाली दिल्ली में करवायी और बहाल हुए सभी लोग बाहर के हैं. इसके बाद भूमि सुधार और स्थानीय नीति को लेकर जेएमएम विधायक नारे लगाने लगे. वो वेल में उतर आए. हंगामा देखते हुए स्पीकर ने सदन को एक घंटे के लिए बर्खास्त कर दिया. दोबारा एक घंटे के बाद जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो फिर से जेएमएम के विधायक नारा लगाने लगे और नारेबाजी के बीच मंत्री सरयू राय ने अनुपूरक बजट सदन में रखा. जिसके बाद सदन की कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया गया.   

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