Skip to content Skip to navigation

विधानसभा में नेता चुंबन, दारू बहस में है व्यस्त, राज्य की जनता गरीबी, भूख व बेकारी से पस्त

News Wing

Ranchi, 13 December : राजधानी के बिरसा चौक पर भोजन अधिकार अभियान पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का आयोजन नरेगा वाच और झारखंड भोजन अधिकार की ओर से किया गया था. इस कार्यक्रम में भोजन अधिकार से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता बलराम ने कहा कि राज्य के गरीबों  के हक के लिए आवज उठाने वाला कोई नहीं है. साथ ही कहा कि विधानसभा में चुंबन, दारू पर बहस हो रही है और राज्य के गरीब भूख से मर रहे हैं.

इसे भी पढ़ें - सरकार रंगमंच बनाने में व्यस्त, सबसे ज्यादा खर्च कर रहा है पीआरडी विभाग, सरकार कर रही पैसों का बंदरबांट : हेमंत सोरेन

राज्य में जन वितरण प्रणाली की स्थिती दयनीय - सामाजिक कार्यकर्ता

वहीं धरना को संबोधित करते हुए वहां मौजूद अन्य वक्ताओं ने तथ्य के आधार पर कहा कि राज्य में जन वितरण प्रणाली की स्थिती दयनीय है कि राशन कार्ड का आधार से जुड़ा ना होने की वजह से 11.5 लाख कार्ड रद्द हो गये. जबकि  राशनकार्ड में परिवार के कुछ सदस्यों के नाम का मौजूद ना होना, इपॉश मशीन द्वारा उंगलियों के निशान ना पहचाना जाना, भ्रष्ट डीलरों द्वारा अनाज में कटौती करना पूरे राज्य में यह समस्या है. इसी आयोजन में गढ़वा के मानिकचंद कोरवा ने बताया कि आदिम जनजाति को उनके घर तक डाकिया योजना के तहत अनाज नहीं पहुंचाया जा रहा है. जिससे वह सभी अनाज पाने से वंचित हो जा रहे हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें नियमित रूप से पूरा अनाज नहीं मिलता और झारखंड की जन वितरण प्रणाली, जो आधार के कारण पहले से ही काफी कमज़ोर है, अब नकद हस्तांतरण से और खतरे में है.

मंत्रियों का वेतन हजारों में बढ़ता है लेकिन मजदूरों का मात्र एक रूपया 

वक्ताओं ने विधायक वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि विधायक और मंत्री को वेतन हजारों में बढ़ता है. जबकि मनरेगा मज़दूरों की मज़दूरी काफी कम बढ़ी है. पिछले वर्ष झारखंड की नरेगा मजदूरी केवल पांच रुपये ही बढ़ी थी (162 रुपये से), और इस वर्ष केवल 1 रुपये. ऐसे में मजदूरों के सामने भूखमरी का संकट आना स्वभाविक है.

इसे भी पढ़ें - रांची : आम से खास तक के लिए सरकार ला रही है 45 हजार की साइकिल, भाड़ा होगा 5 रुपया प्रति घंटा

मौके पर मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता अफजल अनीस और आकाश रंजन ने रांची जिला के नगड़ी प्रखंड में शुरू हुए नकद हस्तांतरण के पायलेट की जांच के निष्कर्ष रखे. उन्होंने बताया कि गरीब परिवारों को बैंक से राशि निकालकर 32 रुपये प्रति किलो के दर से राशन खरीदने में कई समस्याएं हो रही हैं. कई बार परिवारों को पता नहीं चलता कि पैसा उनके किस खाते में गया है. उन्होंने यह भी कहा कि इस जन-विरोधी नीति से राज्य के बाकी क्षेत्रों में विस्तार का भी खतरा है.

कार्यक्रम में भूख से हुई मौतों पर भी चर्चा हुई

भोजन अधिकार अभियान पर आयोजित कार्यक्रम में हाल में हुई भूख से मौतों पर भी काफी चर्चा हुई. तारामनी साहू, जिन्होंने सिमडेगा में 11वर्षीय बच्ची (संतोषी कुमारी) की भूख से हुई मृत्यु पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया और इस घटना के तथ्यों को लोगों के समक्ष रखा. 20 अगस्त 2017 से वे संतोषी के परिवार को एक नया राशन कार्ड दिलवाने का प्रयास कर रही थीं क्योंकि परिवार का पुराना राशन कार्ड आधार-सीडिंग न होने के कारण रद्द हो गया था. (27 मार्च 2017 को झारखंड के मुख्य सचिव ने आधार से न जुड़े सब राशन कार्डों को रद्द करने का आदेश दिया था.) पर संतोषी राशन के अभाव में आठ दिन भूखी रही. तब से  तारामनी और संतोषी की मां को झारखंड सरकार द्वारा लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है. इस मामले में और बाकी भूख से हुई मौत के मामले में सरकार तथ्यों को मानने के लिए राजी नहीं है और उल्टा भूख के शिकार हुए परिवारों को परेशान कर रही है.

इसे भी पढ़ें - संथाल के लिए जहर है कि प्यार है तेरा चुम्मा, बीजेपी ने पूछा जेएमएम से

राज्य में हो रही भूख से मौत की घटना, रोज़गार व अन्य अधिकारों के उल्लंघन के विरुद्ध वक्ताओं ने  आक्रोश प्रकट किया और थाली बजाओ कार्यक्रम की शुरूआत की गई. इस धरना को बलराम, जेम्स हेरेंज, जवाहर, अंकिता, सिराज, आकाश, अशर्फीनंद ने भी संबोधित किया. धरने में खूंटी, लातेहार, पलामू, गढ़वा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम, लोहरदगा, हजारीबाग, सिमडेगा, गुमला, दुमका, धनबाद से आये मनरेगा मजदूरों ने सरकार के जनविरोधी नीतियों के खिलाफ बात रखी. 

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Top Story
City List: 
Share

Add new comment

loading...