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सीएम रघुवर दास के दबाव में पार्टी अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ ने किया मुझे निलंबितः रविंद्र तिवारी

NEWS WING

Ranchi, 11 December:   जिस काम के लिए सीएम रघुवर दास को तत्काल सीएम पद से निलंबित कर देना चाहिए. उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. उस काम के लिए मुझे पार्टी की सदस्यता से निलंबित कर दिया गया. ऐसा राजनीति में कभी नहीं होता था जो झारखंड में हो रहा है. कभी सरकार के अनुकूल पार्टी नहीं रहती है. लेकिन झारखंड में पार्टी सरकार के अनुकूल हो गयी है. नेतृत्व बिल्कुल निरंकुश हो गया है. इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना होगा. अगर झारखंड में रघुवर दास को पार्टी तत्काल प्रभाव से सीएम पद से नहीं हटाती है, तो पार्टी आने वाले दिनों में भुगतने को तैयार रहे. इन बातों को मीडिया के सामने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद के सदस्य और पलामू जिले के बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविंद्र तिवारी ने बीजेपी से निलंबन के बाद रख रहे थे. उन्होंने रघुवर दास को पार्टी के लिए खतरा बताया.

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बीजेपी हिंदुत्ववाद पर खड़ी और ब्राह्मण उसकी ताकत

श्री तिवारी ने कहा कि गढ़वा में सीएम ने कहा कि पलामू, लातेहार और गढ़वा में जात के आधार पर राजनीति होती है. यहां ब्राह्मणवाद और बेटी-रोटी का वास्ता देकर वोट मांगा जाता है. एक ब्राह्मण बहुल क्षेत्र में ऐसा कहना ब्राह्मणों का अपमान है. मैंने इस बात पर बस इतना कहा कि अगर सीएम ने ऐसी बात कही है तो उन्हें माफी मांगनी चाहिए. क्योंकि बीजेपी हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की ताकत पर खड़ी है. बात दीन दयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, अटल बिहारी बाजपेयी या फिर लाल कृष्ण आडवानी की हो. ये सभी ब्राह्मण नेता थे. जिनके वजह से बीजेपी को पहचान मिली. ऐसे में कोई कैसे बीजेपी में ब्राह्मणों का अपमान कर सकता है.

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बीजेपी के संविधान का उल्लंघन

श्री तिवारी ने कहा कि मेरे निलंबन के मामले में बीजेपी के संविधान का उल्लंघन हुआ है. ना ही आरोप पत्र भरा गया और ना किसी ने मेरा पक्ष जानने की कोशिश की. सिर्फ सीएम के कहने पर पार्टी अध्यक्ष ने फरमान जारी कर दिया. निलंबन लेटर में लिखा है कि मैं सोशल मीडिया में पार्टी के खिलाफ अनरगल बात लिख रहा था. अगर ऐसी बात है तो मुझे बताया जाए कि मैंने पार्टी के खिलाफ कहां और क्या लिखा है.

पार्टी में किसी की नहीं चलती, एक व्यक्ति का हो गया है एकाधिकार

बीजेपी जिस लोकतांत्रिक संरचना की वजह से जानी जाती थी. लो लोकतंत्र झारखंड में नहीं बचा है. किसी मंत्री को कुछ बोलने की हिम्मत नहीं. मुझे ताज्जुब होता है कि कैसे एक परिवहन मंत्री राज्य के परिवहन सुरक्षा परिषद का सदस्य तक नहीं है. जबकि दूसरे राज्यों में राज्य का परिवहन मंत्री सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष होता है. यहां परिषद का अध्यक्ष सीएम हैं. वहीं कैबिनेट के फैसलों में भी किसी मंत्री से किसी तरह की कोई सलाह नहीं ली जाती. मंत्री यहां चुप्पी लगाए बैठे हैं. मैं दिल्ली के केंद्रीय नेतृत्व को इन सारी बातों की जानकारी दूंगा.   

 

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