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ट्रांसपोर्ट नगर बनने से छिन जायेगा किसानों का रोजगार (देखें वीडियो)

Manish Jha, NEWSWING

Ranchi, 13 December : पंडरा राजधानी रांची की बड़ी व्यावसायिक मंडी है. पंडरा में ट्रांसपोर्ट नगर बसाना कहीं से भी उचित नहीं है. सरकार द्वारा एक बसे-बसाये मंडी को उजाड़ने की यह कवायद मात्र है. अपर बाजार इससे पहले थोक व्यवसाय का केन्द्र हुआ करता था. बाद में बाजार समिति की ओर से पंडरा में गोदामों व दुकानों का निर्माण कराकर व्यापारियों को आवंटित कराया गया. अब पंडरा के 300 दुकानों व गोदामों को उजाड़कर ट्रांसपोर्ट नगर बसाना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता. वैसे भी ट्रांसपोर्ट नगर बसाने के लिए जितनी जमीन की उपलब्धता होनी चाहिए. पंडरा उस अहर्त्ता पर खड़ा नहीं उतरता. पूर्व की सरकार ने ट्रांसपोर्ट नगर के लिए 105 एकड़ जमीन की जरूरत बतायी थी. जाहिर है इन चार-पांच वर्षों में व्यवसाय में भी अप्रत्याशित वृद्धि हुई है. ऐसे में ट्रांसपोर्ट नगर बसाने के लिए अनिवार्य 105 एकड़ जमीन का दायरे को एक तिहाई घटा दिया है. यह प्रस्ताव इसकी सफलता पर ग्रहण लगता दिख रहा है. पंडरा संकीर्ण एरिया है. ट्रांसपोर्ट नगर वैसे स्थान पर बसाने की जरूरत है, जहां से राजधानी के हर क्षेत्र से आने वाले लोगों के लिए आवाजाही सरल व सहज हो. ट्रांसपोर्ट नगर बने, किसान, मजदूर नेता इसका विरोध नहीं करते हैं परंतु जगह का चयन उचित हो. सरकार बाजार की तमाम पहलूओं को बारीकी से अध्ययन कर लें. सिर्फ अधिकारियों की सलाह पर कदम उठाने से शिवाय पछताने के कोई रास्ता नहीं बचेगा.

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किसानों का रोजगार छीनना चाहती है रघुवर सरकार : उपेंद्र महतो (सब्जी विक्रेता एवं किसान नेता)

पंडरा बाजार के सब्जी विक्रेता एवं किसान नेता उपेंद्र महतो कहते हैं कि किसानों को परेशान करने की साजिश रची गयी है, जो किसानों के हित में नहीं है. तीन साल हो चुके हैं, हमलोग के लिये एक भी काम नहीं किया गया है. सरकार सिर्फ बेवजह परेशान करने की बात करती है. किसी भी किसान का अभी तक बीमा नहीं हो पाया है. आप ट्रांसपोर्ट नगर बनायें लेकिन रिंग रोड इधर बनाया जाये जिससे किसानों और जनता को भी परेशान नहीं होगी. सरकार से आग्रह है कि ट्रांसपोर्ट नगर बनाने की योजना जल्द से जल्द वापस ले.

ट्रांसपोर्ट नगर बनने से सब्जी विक्रेता अनाथ हो जायेंगें : मटरु उरांव

मटरु उरांव कहते हैं कि मंडी जब से अपर बाजार से स्थांनतरण हो कर पंडरा बाजार में बसाया गया, तब से हम अभी तक सब्जी बेच रहे हैं. अगर हटा दिया गया तो फिर हमलोगों के भूखे रहने की नौबत आ जायेगी. गांव, देहात के लोग इससे अधिक प्रभावित होंगें.

किसान के हित में नहीं है ट्रांसपोर्ट नगर : राम दयाल (किसानों के शुभचिंतक)

राम दयाल ने कहा कि यह बिल्कुल नाजायज नीति है. जब पंडरा बाजार की शुरुवात हुई थी तो सरकार गांव-गांव जाकर किसानों को बाजार में आने के लिये प्रेरित करती थी. प्रलोभन के रूप में सरकार तेल, बीज, खाद मुफ्त में बांटती थी. अब किसानों को भगाने की योजना बना रही है. यह किसानों के हित में कदापी नहीं है. अगर ऐसा होता है तो दस गांव के किसान सड़क पर आकर विरोध करेंगे. ट्रांसपोर्ट नगर तो बिल्कुल नहीं बनने देंगे.

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नंदन प्रसाद (स्थानीय दुकानदार) : ट्रांसपोर्ट नगर तो पंडरा समिति के लिये एक गलत योजना है जिससे आम आदमी जाम से काफी परेशान रहेंगे. ऐसे आप देखें तो पंडरा से रातू रोड व्यस्तम इलाका है. और यह बनने से तो और जाम की समस्या गहराती जायेगी. दुर्घटना की सम्भवना भी बढ़ जायेगी. इसलिये सरकार ट्रांसपोर्ट नगर बनाने की योजना जितनी जल्द वापस ले, अच्छा होगा.

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धुरी राय (मोटिया मजदूर नेता) : ये बताते हैं कि मजदूर, मोटिया को बेघर करने की नीति है. हजारों की संख्या में मोटिया लोग भूखे रहने के कगार पर आ जायेंगे. जो हमलोग नहीं होने देंगे. जान दे देंगे लेकिन पंडरा बाजार समिति की दुकान नहीं टूटने देंगे.

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