सरकार रंगमंच बनाने में व्यस्त, सबसे ज्यादा खर्च कर रहा है पीआरडी विभाग, सरकार कर रही पैसों का बंदरबांट : हेमंत सोरेन

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Ranchi, 13 December: सदन की कार्यवाही खत्म होने के बाद काफी इंतजार कराने के बाद नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन मीडिया के सामने आए. उन्होंने कहाः अनुपूरक बजट पर टिप्पणी करने से पहले सरकार ये बताए कि उसके कोषागार में कितने पैसे हैं. कहाः सरकार के पास पैसा है ही नहीं है. जबकि राजस्व कमाने वाला सभी विभाग सीएम के पास है. फिर भी सरकार का खजाना खाली है. सरकार ने खुद से शराब बेचने का निर्णय लिया. निर्णय लेने के बाद से सरकार को 500-600 करोड़ का नुकसान हो चुका है. माइनिंग विभाग का भी यही हाल है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि सरकार रंगमंच बनाने में व्यस्त है. सबसे ज्यादा खर्च पीआरडी विभाग कर रहा है. बड़े-बड़े प्रोग्राम किए जा रहे हैं. बॉलीवुड और हॉलीवुड से कलाकार आ रहे हैं. भव्य-भव्य कार्यक्रमों का लुत्फ उठाया जा रहा है. कहाः ऐसा करके सरकार झारखंड की जनता को दिगभ्रमित करने की कोशिश कर रही है. ये अनुपूरक बजट सिर्फ जनता को बेवकूफ बनाने के लिए है.

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अब क्या सीएम के सामने रोएं

श्री सोरेन ने कहा कि सूबे के मुखिया कहते हैं कि सदन को चलने दिया जाए. शालीनता से सदन में विपक्ष बात रखे. तो क्या अब तक हम शालीन नहीं थे? कहाः सीएम क्या चाहते हैं कि हम अपनी बात सदन में रखने से पहले उनके पास रोएं. साष्टांग करें. अब हमें उनसे सीखना होगा कि अपनी बात कैसे रखनी है. कहाः आदिवासी, मूलवासी, जल, जंगल और जमीन बीजेपी के राज्य में प्रभावित हो रहे हैं. क्या इस बात की चिंता सरकार को नहीं होनी चाहिए. भूमि अधिग्रहण बिल 2013 को संशोधित किया गया. इसके बाद से जमीन घोटाला शुरू है. सड़क से लेकर सदन तक घोटाला हो रहा है.

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जमीन कंपनी को देकर ली जा रही है मोटी रकम

श्री सोरेने ने कहा कि भूमि अधिग्रहण विधेयक लाकर सरकार झारखंड की सारी जमीन कॉरपोरेट हाउस को देना चाहती है. हाल ही में 150 एकड़ का जमीन घोटाला हुआ, जो कुछ अखबारों में आया भी. अनगड़ा में एक रुपए में करोड़ों की जमीन किसी एनजीओ को दे दी गयी. सरकार ये जमीन आखिर किस हैसियत से दे रही है. क्या ये जमीन सरकार की है. कितने जगहों पर बंदोबस्त जमीन कंपनियों को दे दी जा रही है. भूमि अधिग्रहण बिल को वापस करने का जेएमएम पूरी कोशिश करेगी. सरकार सवाल-जवाब से बच रही है. इसलिए सत्र को छोटा रखा गया है.

निकाय चुनाव दलगत होगा ये विधेयक विधानसभा से क्यों पास नहीं हुआ

अभी कैबिनेट में फैसला लिया गया कि निकाय चुनाव अब दल के आधार पर लड़े जाएंगे. अभी कई निकायों का मामला कोर्ट में है. क्या इन सभी बातों पर विचार कर के अध्यादेश लाया गया है. हर चीज अध्यादेश के जरिए लाकर सरकार लोगों पर थोपने का काम कर रही है. विधानसभा में इन बातों को क्यों नहीं रखा जाता. गुजरात चुनाव पर श्री सोरेन ने कहा कि दुनिया जानती है कि बीजेपी चुनाव लड़ने के लिए पैसे कहां से लाती है. सभी बीजेपी शासित प्रदेश और केंद्र सरकार मिलकर चुनाव के लिए पैसा जमा करती है. उसी तरह अब झारखंड में बीजेपी कार्यालय बनाने के लिए भी सरकारी खजाने का बंदरबांट होगा.    

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