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ट्रंप के यात्रा प्रतिबंध पर अदालती रोक, व्हाइट हाउस चुनौती देगा

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वाशिंगटन: वाशिंगटन राज्य में एक संघीय न्यायाधीश ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सप्ताह भर पुराने आव्रजन आदेश के देश में लागू करने पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। इसके साथ ही सात मुस्लिम बहुल देशों के वीजाधारी लोगों के अमेरिका आगमन का रास्ता साफ हो गया है। वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि शुक्रवार के इस अदालती कदम के बाद सरकारी अधिकारियों ने तत्काल विमानन कंपनियों से संपर्क साधना और ऐसे कदम उठाने शुरू कर दिए ताकि उन लोगों को यात्रा की अनुमति दी जा सके, जिन्हें पूर्व में रोक दिया गया था।

इस बीच, व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा कि न्याय विभाग यथाशीघ्र इस अदालती आदेश को चुनौती देगा।

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता सीन स्पाइसर ने शुक्रवार रात एक बयान में कहा, “न्याय विभाग (डीओजी) यथाशीघ्र इस अपमानजनक आदेश पर रोक लगाने की अपील करेगा और राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश का बचाव करेगा, जो कि हमें लगता है कि वैध और उचित है।” हालांकि चंद मिनट बाद इसी तरह का एक बयान जारी किया गया, जिसमें अपमानजनक शब्द को हटा दिया गया था।

स्पाइसर ने कहा, “राष्ट्रपति के आदेश का मकसद देश की रक्षा करना है और उनके पास अमेरिकी नागरिकों की रक्षा करने का संवैधानिक अधिकार और जिम्मेदारी है।”

इससे पहले संघीय न्यायाधीश जेम्स एल. रॉबर्ट ने वाशिंगटन राज्य के अटॉर्नी जनरल बॉब फर्गुसन के आग्रह पर ट्रंप के इस आदेश पर रोक लगा दी है। अटॉर्नी जनरल के कार्यालय के अनुसार यह आदेश देशभर में मान्य रहेगा।

रॉबर्ट ने आदेश में कहा, “अदालत का यह फैसला है कि आज जिन परिस्थितियों में यह मामला अदालत के समक्ष लाया गया है, उसे हमारी त्रिपक्षीय सरकार प्रणाली में अपनी संवैधानिक भूमिका निभाने के लिए अवश्य हस्तक्षेप करना चाहिए।” रॉबर्ट की नियुक्ति तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने की थी।

न्यायाधीश और विदेश विभाग के अधिकारियों ने खुलासा किया कि ट्रंप के आदेश के परिणामस्वरूप लगभग 60,000 (संभवत: यह 100,000 हो सकता है) वीजा औपचारिक तौर पर रद्द हो चुके हैं।

सिएटल के इस न्यायाधीश का फैसला आने के ठीक बाद बोस्टन में एक संघीय न्यायाधीश ने एक अलग तरह का आदेश पारित किया। न्यायाधीश ने मेसाचुसेट्स में एक अस्थायी प्रतिबंधात्मक आदेश के नवीनीकरण से इंकार कर दिया।

वाशिंगटन के अटॉर्नी जनरल बॉब फर्गुसन ने रॉबर्ट के आदेश को अपनी तरह का पहला आदेश बताया और घोषणा की कि इस आदेश के बाद कार्यकारी आदेश तत्काल निष्प्रभावी हो गया।

अमेरिकन सिविल लिबर्टी यूनियन (एसीएलयू) में आव्रजन अधिकार परियोजना के निदेशक, उमर जदवात ने कहा, “हम देख रहे हैं कि न्यायालय ने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लागू आदेश को असंवैधानिक करार दे दिया।”

उन्होंने कहा, “जाहिर तौर पर और भी मुकदमे आएंगे, लेकिन यह वाकई में इस देश के लोगों के लिए और अन्य देशों के लोगों के लिए अच्छी खबर है, जिन्हें इस प्रबिंध के जरिए गलत तरीके से धार्मिक आधार पर निशाना बनाया गया है।”

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने भी तत्काल रॉबर्ट के आदेश की प्रशंसा की। इसमें सीनेट के अल्पमत के नेता चुक शूमर भी शामिल हैं।

शूमर ने एक बयान में कहा, “यह संविधान की और हम सभी की जीत है, जो मानते हैं कि अमेरिकी विचारधारा से उलट यह आदेश हमें सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकता।”

उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप को अदालत का यह फैसला मानना चाहिए और उन्हें अपना कार्यकारी आदेश हमेशा के लिए वापस ले लेना चाहिए।”

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